पृष्ठ

समर्थक

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

दर्द






अपने ही जब देने लगे दर्द तो...
क्या है जीने में मजा
विश्वास का नीव ही हिल जाएँ तो ...
क्या है जीने मे मजा
अश्क जब बन जाएँ खून तो ...
क्या है जीने में मजा 
नैया रहे जब बिन मांजी तो.... 
क्या है जीने मे मजा 


अंजना 

6 टिप्‍पणियां:

  1. अनुपम भाव लिए सुंदर रचना...बेहतरीन पोस्ट .

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: आँसुओं की कीमत,....

    उत्तर देंहटाएं
  2. tabhi to hai jeene ka maja... jab dard bhi ho, aur aanshu bhi ho, fir bhi ham lad kar us se aage badh jayen...:)

    उत्तर देंहटाएं
  3. सच है ऐसे जीने में कुछ मज़ा नहीं ... पर जीना फिर भी पढता है ...

    उत्तर देंहटाएं