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मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

दुनिया

स्वार्थ का आंचल थामे ये दुनिया

व्यर्थ का ढोग रचाती ये दुनिया

जाने किस ओर जायेगी ये दुनिया

पीडित हो उठा है मन देख ये दुनिया

जीवन का अंत मात्र शून्य ही तो है

फिर भी कपट का दामन न छोडे ये दुनिया

18 टिप्‍पणियां:

  1. Yaad aa gaya, aapki rachna padhke:
    Na kuchh tera, na kuchh mera!
    Ye duniya ek rain basera!
    Phir kahe ko sari umariya,
    Paap ki gathri dhoye?

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  2. आज कि मौजूदा स्थिति को व्यक्त करती हुई ये ......बेहतरीन रचना .......बहुत खूब लिखा आपने

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  3. दुनिया है ही ऐसी,अच्छा लिखा है आपने।

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  4. फिर भी कपट का दामन न छोडे ये दुनिया

    sunadar rachna


    bahut khub

    shkhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/

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  5. ye duniya agar mil bhi jaye to kya hai...
    http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

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  6. वर्तमान समय को शत प्रतिशत परिभाषित करती है आपकी कविता !
    “लालच को ओढ कर बैठी ये दुनिया
    दीन और ईमान से आँखे चुराती ये दुनिया “

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  7. स्वार्थ का आंचल थामे ये दुनिया
    व्यर्थ का ढोग रचाती ये दुनिया .......
    सुंदर रचना।

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  8. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद ।
    संहिता जी दो लाइन जो आप ने जोडी उस से इस कविता मे ओर निखर आ गया ।आभार ..

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  9. दुनिया की असलियत बतलाती रचना | स्वार्थी , ढोंगी ,मन को पीड़ा देने वाली । जीवन काअंत शून्य होते हुए भी ये दुनिया और इस दुनिया में रहने वाले कपट का दामन थामे हुए है |बहुत पुराने ज़माने में गुरुदत्त की एक फिल्म थी प्यासा उसमे गाना था ""ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है"" ,उसी तरह की विचार धारा की आपकी रचना बहुत अच्छी लगी

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  10. सुन्दर कविता ! दुनिया तो कपट और छल ही है ! इसी लिए तो इसे माया कही गयी है !

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  11. bahut behtareen kavita....
    achhi rachna ke liye badhai...
    mere blog par is baar..
    नयी दुनिया
    jaroor aayein....

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  12. महाभारत में यक्ष ने युधिष्ठर से पूछा था कि सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है......यही हकीकत है....क्या आश्चर्य जो अब भी स्वार्थी है दुनिया...

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  13. Kitna saty kaha hai...duniya sadiyon se aisi hai aur rahegi...

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