पृष्ठ

समर्थक

रविवार, 6 मई 2012

यादे



हर पल हर लम्हा जाता है गुजर
रह जाती है बस यादें शेष
भविष्य के दर्पण मे
जब भी खुलता है
भूतकाल का वो अक्स
होता है इक सुखद अहसास
फिर मन को
उम्र के उस दराज में
ये स्मृतियाँ ही
रह जाती है शेष ..
दे जाती है जो
इक मीठी सी..
चुभन दिल को..
उमंग और उत्साह को
चित्रित करते ये चित्र
बोझिल होते उस पल में
बिखेर जाते है खशबु अपनी ।

(अजंना)
चित्र गूगल से साभार