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गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

कश्ती


 तूफान आया , जब  शांत  हुआ दरिया

सोचा  चलो  निकाल लो कश्ती

चल पडे राह पर फिर अपने

दिल मे थे अरमान

आँखो मे थी कुछ नमी

पहुँचे जब किनारे के करीब

पाने को थे अभी मंजिल को

आया जोश लहरो को

पहुँचा दिया भँवर में हमें फिर

उठी आँधीफिर जलते अरमानो की

जिसे फिर दिया नाम लोगो ने

अलग अलग फरमानो से ।



सर्वाधिकार सुरक्षित

36 टिप्‍पणियां:

  1. आख़िरी पांच पंक्तियाँ तो लगता है कि ब पढ़ते रहो...
    बहुत खूब...

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  2. पूजा जी,आप इसी तरह मेरा उत्साह वर्धन करती रहे। शुक्रिया ...

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  3. ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

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  4. संजय जी, आपने जो प्रोत्साहन दिया है उसके लिए आभारी हूं

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  5. ऐसे ही चलता रहता है चक्र ...अच्छी प्रस्तुति

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  6. डाँ रुपचंद्र शास्त्री जी और संगीता जी मेरा उत्साहवर्धन के लिए आप दोनो का बहुत-बहुत आभार....

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  7. यही तो जीवन है। सुन्दर कविता। बधाई।

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  8. अंतर्द्वन्द की रचना
    या शायद भंवर ही जिन्दगी है

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  9. आशीष जी, निर्मला जी,वर्मा जी आप सभी का बहुत बहुत आभार ...

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  10. आदरणीय "अंजना" जी
    सादर प्रणाम
    बहुत सार्थक कविता ....शुक्रिया

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  11. मैंने अपना पुराना ब्लॉग खो दिया है....
    प्लीज़ फोल्लो माय न्यू ब्लॉग..
    मेरा नया बसेरा.......

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  12. bilkul sach likha hai aapne jivan ke armaan kabhi pure ho jaate hai kabhi beech bhanvar me fans kar rah jaate hain.
    bahut hi badhiya prastuti.
    poonam

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  13. कभी किनारे मिलने को भी होता है तो समय यूँ ही दगा देता है। सच है जिंदगी भंवर में ही कट जाती है।

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  14. आप सभी का बहुत बहुत आभार ..इसी तरह आप मेरा उत्साहवर्धन करते रहे।

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  15. आपको एवं आपके परिवार को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनायें !

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  16. जय श्री कृष्ण...आपका लेखन वाकई काबिल-ए-तारीफ हैं....नव वर्ष आपके व आपके परिवार जनों, शुभ चिंतकों तथा मित्रों के जीवन को प्रगति पथ पर सफलता का सौपान करायें .....मेरी कविताओ पर टिप्पणी के लिए आपका आभार ...आगे भी इसी प्रकार प्रोत्साहित करते रहिएगा ..!!

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  17. मानव जीवन के रंगों को प्रस्तुत करती सुंदर रचना - नव वर्ष की मंगल कामना

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  18. वाह क्या लिखा है आपने... बहुत गहरी छाप छोडती रचना ...

    आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ ...

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  19. बहुत खूब लिखा है आपने ...अंतिम पंक्तियाँ दिल पर असर कर गयी ....शुक्रिया

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  20. बहुत सुन्दर रचना
    कई पंक्तियाँ दिल पर पूरा असर छोडती हैं
    बधाई & आभार

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  21. anjanaji sadar pranam makar sankranti /pongal/khichdi par badhai aur shubhkamnayen.sundar kavit

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  22. आपको और आपके परिवार को मकर संक्रांति के पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ !"

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  23. बहुत ही सुन्दर कविता है.आप की कलम को शुभ कामनाएं

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  24. आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया ।

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  25. एक निवेदन.......सहयोग की आशा के साथ....

    मैं वृक्ष हूँ। वही वृक्ष, जो मार्ग की शोभा बढ़ाता है, पथिकों को गर्मी से राहत देता है तथा सभी प्राणियों के लिये प्राणवायु का संचार करता है। वर्तमान में हमारे समक्ष अस्तित्व का संकट उपस्थित है। हमारी अनेक प्रजातियाँ लुप्त हो चुकी हैं तथा अनेक लुप्त होने के कगार पर हैं। दैनंदिन हमारी संख्या घटती जा रही है। हम मानवता के अभिन्न मित्र हैं। मात्र मानव ही नहीं अपितु समस्त पर्यावरण प्रत्यक्षतः अथवा परोक्षतः मुझसे सम्बद्ध है। चूंकि आप मानव हैं, इस धरा पर अवस्थित सबसे बुद्धिमान् प्राणी हैं, अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारी रक्षा के लिये, हमारी प्रजातियों के संवर्द्धन, पुष्पन, पल्लवन एवं संरक्षण के लिये एक कदम बढ़ायें। वृक्षारोपण करें। प्रत्येक मांगलिक अवसर यथा जन्मदिन, विवाह, सन्तानप्राप्ति आदि पर एक वृक्ष अवश्य रोपें तथा उसकी देखभाल करें। एक-एक पग से मार्ग बनता है, एक-एक वृक्ष से वन, एक-एक बिन्दु से सागर, अतः आपका एक कदम हमारे संरक्षण के लिये अति महत्त्वपूर्ण है।

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