पृष्ठ

समर्थक

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

शब्दो का प्रहार




हर टूटे रिश्ते की नींव होती है शुरु
शव्द रुपी प्रहार से
लाठी हो या पत्थर 
होता है बस जिस्म ही घायल 
जिस्म की हड्डियो की टूटन 
 हो जाते है खत्म....
दवा व प्रेम की महलम से 
लेकिन..शब्दों के प्रहार का  दर्द् 
कर् जाता है हर रिश्ते को  घायल ।


(अंजना )


चित्र गूगल सर्च से साभार


   

2 टिप्‍पणियां:

  1. रिश्ते मीठे शब्दों से बोल कर बनते है,
    अनुपम भाव लिए सुंदर रचना...बेहतरीन पोस्ट
    .
    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: आँसुओं की कीमत,....

    उत्तर देंहटाएं