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गुरुवार, 28 जून 2012

हँसी





दुख रुपी परतो के अवरण में
फँसी ये हँसी 
चीखती हैचिल्लाती है...
कर दो आजाद मुझे
दुख डर की..
सलाखो को निहारती ये हँसी...
मौन हो मन ही मन बुदबुदाती
कर दो आजाद अब तो मुझे
तभी दुखी परते सुन ये बुदबुदाहट
फैलाती है अपने पँख
ओर ले लेती है फिर
अपनी ओट मे..
मौन के सन्नाटे मे फिर..
खत्म हुआ अस्तित्व 
 इस हँसी का

Anjanna

चित्र गूगल साभार 

रविवार, 6 मई 2012

यादे



हर पल हर लम्हा जाता है गुजर
रह जाती है बस यादें शेष
भविष्य के दर्पण मे
जब भी खुलता है
भूतकाल का वो अक्स
होता है इक सुखद अहसास
फिर मन को
उम्र के उस दराज में
ये स्मृतियाँ ही
रह जाती है शेष ..
दे जाती है जो
इक मीठी सी..
चुभन दिल को..
उमंग और उत्साह को
चित्रित करते ये चित्र
बोझिल होते उस पल में
बिखेर जाते है खशबु अपनी ।

(अजंना)
चित्र गूगल से साभार 


शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

दर्द






अपने ही जब देने लगे दर्द तो...
क्या है जीने में मजा
विश्वास का नीव ही हिल जाएँ तो ...
क्या है जीने मे मजा
अश्क जब बन जाएँ खून तो ...
क्या है जीने में मजा 
नैया रहे जब बिन मांजी तो.... 
क्या है जीने मे मजा 


अंजना 

शब्दो का प्रहार




हर टूटे रिश्ते की नींव होती है शुरु
शव्द रुपी प्रहार से
लाठी हो या पत्थर 
होता है बस जिस्म ही घायल 
जिस्म की हड्डियो की टूटन 
 हो जाते है खत्म....
दवा व प्रेम की महलम से 
लेकिन..शब्दों के प्रहार का  दर्द् 
कर् जाता है हर रिश्ते को  घायल ।


(अंजना )


चित्र गूगल सर्च से साभार


   

शनिवार, 7 अप्रैल 2012

एहसास



खुशी हो कर भी खुशी का एहसास नहीं  ।


दर्द ए चुभन हो कर भी चुभन का एहसास नही ।


ऎसा हुआ है क्या ?


कि इस गहराई में डूब कर भी


डूबने का एहसास नही ।

(अंजना )

चित्र गूगल साभार 

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

धड़कन



तेरी जुदाई के डर से

काँप जाता है दिल मेरा

तेरे बिन जीने के खयाल से

सहर जाता है बदन मेरा

तेरे दिल की धड़कन से ही

धडकता है दिल मेरा

आज तू है तो है वजूद

तेरे बिन न कोई वजूद मेरा




गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

कश्ती


 तूफान आया , जब  शांत  हुआ दरिया

सोचा  चलो  निकाल लो कश्ती

चल पडे राह पर फिर अपने

दिल मे थे अरमान

आँखो मे थी कुछ नमी

पहुँचे जब किनारे के करीब

पाने को थे अभी मंजिल को

आया जोश लहरो को

पहुँचा दिया भँवर में हमें फिर

उठी आँधीफिर जलते अरमानो की

जिसे फिर दिया नाम लोगो ने

अलग अलग फरमानो से ।



सर्वाधिकार सुरक्षित

बुधवार, 28 जुलाई 2010

मेरी कूची व कलम




जख्म से रिसते लहू का गिरना

न देख पाये हम अब ।
मौत की वादी में खुशी का अहसास
न कर पाये हम अब ।
हर चेहरे के पीछे इक नया चेहरा
न सह पाये हम अब ।
समुद्र की तूफानी लहरों में जीने की आशा..
न धोखा दे पाये मन को हम अब ।
झोली में हो कांटे और करुं फूल का अहसास
न ये कर पाये हम अब ।
गम में हर्ष की कल्पना
ऎसा अहसास न कर पाएं हम अब ।


अंजना की कलम से

बुधवार, 26 मई 2010

बुधवार, 21 अप्रैल 2010

सवाल का जवाब- भाग 2

 लडकी अपने मायके मे अपने आप का रिश्ता छोड़ आती है। यानि  वह एक लड़की का रिश्ता छोड एक नया औरत का रिश्ता सुसराल मे निभाती है।जहाँ बहू,पत्नी, का रिश्ता जोड पति को पाती है।

रविवार, 18 अप्रैल 2010

सवाल आप सब के लिए- भाग 1

मुझे से किसी ने प्रश्न किया कि लड़की की जब शादी होती है तो
जो रिश्ते उस के मायके मे छुट जाते है उस के बदले उसे सुसराल
मे वही रिश्ते मिल जाते है।जैसे माँ के रुप मे सास ,पिता के रुप
मे ससुर ,भाई के रुप मे देवर , बहन के रुप मे ननंद ,लेकिन ऎसा
कौन सा रिश्ता छोड़ती है कि उसे पति मिलता है!!! जवाब जो मैने
दिया वो मै आप को बाद में बताऊंगी । पहले मै आप सब से इस



का उत्तर चाहती हूँ ।

मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

दुनिया

स्वार्थ का आंचल थामे ये दुनिया

व्यर्थ का ढोग रचाती ये दुनिया

जाने किस ओर जायेगी ये दुनिया

पीडित हो उठा है मन देख ये दुनिया

जीवन का अंत मात्र शून्य ही तो है

फिर भी कपट का दामन न छोडे ये दुनिया

मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

मेरी प्यारी गिलहरी




ये गिलहरी जब मेरे घर आई तो उसे
भूखा देख झट से मैने उसे रोटी डाल
दी और भूखी होने के कारण झटपट
रोटी को कुतर कुतर कर खाने लगी
मै भी उसे खाती देखती रही ।सोचा
चलो इन लम्हो को कैद कर ले ,झट
से कैमरा ले कर आ गये । पास जाकर तस्वीर खीची वो तस्वीर आप भी
देखे।कितनी प्यारी लग रही है न ...