शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012
शनिवार, 7 अप्रैल 2012
मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011
गुरुवार, 2 दिसंबर 2010
कश्ती
तूफान आया , जब शांत हुआ दरिया
सोचा चलो निकाल लो कश्ती
चल पडे राह पर फिर अपने
दिल मे थे अरमान
आँखो मे थी कुछ नमी
पहुँचे जब किनारे के करीब
पाने को थे अभी मंजिल को
आया जोश लहरो को
पहुँचा दिया भँवर में हमें फिर
उठी आँधी, फिर जलते अरमानो की
जिसे फिर दिया नाम लोगो ने
अलग अलग फरमानो से ।
सर्वाधिकार सुरक्षित
बुधवार, 28 जुलाई 2010
मेरी कूची व कलम
जख्म से रिसते लहू का गिरना
न देख पाये हम अब ।
मौत की वादी में खुशी का अहसास
न कर पाये हम अब ।
हर चेहरे के पीछे इक नया चेहरा
न सह पाये हम अब ।
समुद्र की तूफानी लहरों में जीने की आशा..
झोली में हो कांटे और करुं फूल का अहसास
न ये कर पाये हम अब ।
गम में हर्ष की कल्पना
ऎसा अहसास न कर पाएं हम अब ।
अंजना की कलम से
बुधवार, 26 मई 2010
बुधवार, 21 अप्रैल 2010
सवाल का जवाब- भाग 2
लडकी अपने मायके मे अपने आप का रिश्ता छोड़ आती है। यानि वह एक लड़की का रिश्ता छोड एक नया औरत का रिश्ता सुसराल मे निभाती है।जहाँ बहू,पत्नी, का रिश्ता जोड पति को पाती है।
रविवार, 18 अप्रैल 2010
सवाल आप सब के लिए- भाग 1
मुझे से किसी ने प्रश्न किया कि लड़की की जब शादी होती है तो
जो रिश्ते उस के मायके मे छुट जाते है उस के बदले उसे सुसराल
मे वही रिश्ते मिल जाते है।जैसे माँ के रुप मे सास ,पिता के रुप
मे ससुर ,भाई के रुप मे देवर , बहन के रुप मे ननंद ,लेकिन ऎसा
कौन सा रिश्ता छोड़ती है कि उसे पति मिलता है!!! जवाब जो मैने
दिया वो मै आप को बाद में बताऊंगी । पहले मै आप सब से इस
का उत्तर चाहती हूँ ।
मंगलवार, 13 अप्रैल 2010
दुनिया
स्वार्थ का आंचल थामे ये दुनिया
व्यर्थ का ढोग रचाती ये दुनिया
जाने किस ओर जायेगी ये दुनिया
पीडित हो उठा है मन देख ये दुनिया
जीवन का अंत मात्र शून्य ही तो है
फिर भी कपट का दामन न छोडे ये दुनिया
व्यर्थ का ढोग रचाती ये दुनिया
जाने किस ओर जायेगी ये दुनिया
पीडित हो उठा है मन देख ये दुनिया
जीवन का अंत मात्र शून्य ही तो है
फिर भी कपट का दामन न छोडे ये दुनिया
मंगलवार, 6 अप्रैल 2010
मेरी प्यारी गिलहरी
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